बाबा अमर सिंह पवन और माता नथिया पांचो बाबरी का इतिहास
बाबा अमर सिंह पवन और माता नथिया पांचो बाबरी का इतिहास
जय बाबा अमर सिंह पवन सभी भक्त जनों को आज आपको सुनने को मिलेगी बाबा अमर सिंह पवन के पवन इतिहास एवं कथा और कोई बड़े से बड़े गुरु ने आपको बाबा अमर सिंह पवन के मां का नाम तो बता रखा होगा लेकिन आज आपको इसके अंदर बाबा अमर सिंह पवन जी के पिताजी का नाम भी पता चलेगा और साथ में पांचों बावरियों की कहानी जानने को मिलेगी एवं
माता नथिया की पौराणिक कथा तो लिए भक्तों शुरू करते हैं अपनी सबसे पहले कहानी बाबा अमर सिंह पवन से बाबा अमर सिंह पवन बाबा अमर सिंह पवन को अमरा नाम से भी जाना जाता है बाबा अमर सिंह पवन सनातन धर्म में एक प्रसिद्ध लोक देवता है जो दिल्ली हरियाणा यूपी और पंजाब में अधिकांश पूजे जाते हैं इनका इतिहास 700 से भी अधिक वर्ष पुराना है इनके गुरु गोरखनाथ को माना जाता है और गुरु गरव को भी इनके गुरु की संज्ञा दी गई है बाबा अमर सिंह को शिव जी का अवतार माना जाता है
और इनका मंदिर यमुना रामघाट वजीराबाद दिल्ली में स्थापित है इसके अतिरिक्त काठा में स्थापित है बाबा अमर सिंह पवन के जोड़े कई शक्ति चलती है जैसे माता नथिया माता महाकाली देवी हिंगलाज पांचों बावरी रेहपा चौधरी माता मसानी माता शितला यमुना मैया और गुरु गोरखनाथ और गुरु गरप के साथ भू माई तथा पांच वीरों की शक्ति इनके साथ चलती है और नौगजा पीर एवं काठे का पीर भी इनके जोड़े चलाता है आइए जानते हैं बाबा अमर सिंह पवन के घर से लेकर धाम तक की संपूर्ण जानकारी
निवास स्थान यमुना रामघाट वजीराबाद दिल्ली काठा गांव अस्त्र सोटा दिन रविवार माता-पिता माता मेस्ट्री पिता फकीरा सवारी सफेद हथनी त्योहार ज्येष्ठ मास गंगा दशहरा इतिहास बाबा अमर सिंह पवन को शिव जी का अवतार माना जाता है इनकी पूजा शिव के बाल रूप में की जाती है और बालक रूप में ही इन्हें पूजा जाता है इनके गुरु गरब है और गोरखनाथ को भी इनका गुरु माना जाता है और माता का नाम मेसरी और पिता का नाम फकीरचंद है जिन्हें फकीरा नाम से जाना जाता है
कथा अनुसार बाबा अमर सिंह पवन को अमरा नाम से भी जाना जाता है और इनका ज काठा गांव में हुआ था कथा अनुसार जब माता मेसरी अमरा को लेकर लकड़ी चुगने आई तो वहां एक नाग ने बालक अमरा को डंक मारा तब सभी गांव के लोग एकत्रित हो गए और सपेरे को बुलवाया गया जब सपेरे से कुछ नहीं हुआ तो लोगों के कहने पर माता मिश्री ने आमरा को यमुना नदी की बहती धारा में बहा दिया और पुत्र वियोग में माता मेसली ने अपने प्राण त्याग दिए माता यमुना की बहती धार में एक बालक को माता नथिया ने बहता हुआ आते देखा माता नथिया ने उस बालक को यमुना नदी से बाहर निकला और माता यमुना ने प्रकट होकर नथिया से अमरा को देवी हिंगलाज के पास ले जाने को कहा माता नथिया ने देवी हिंगलाज की कठोर तपस्या करके उन्हें प्रसन्न किया और अमरा को अमर करवाया माता हिंगलाज ने अमरा को नया नाम
अमर सिंह पवन दिया और साथ में वज्र का शरीर का भी वरदान दिया बाबा अमर सिंह पवन को माता नथिया ने धाग बंगाल राजस्थान में विद्या सिखाए बालक अमर सिंह पवन को माता नथिया ने गुरु गोरखनाथ के पास भेजा और गुरु गोरखनाथ ने उन्हें पांच वीरों का वरदान दिया और धूनी माय भी दी बाबा अमर सिंह पवन ने शिव जी की तपस्या करके उनसे 14 कलाओं का वरदान लिया और शिव ने अमर सिंह पवन को अपने बाल रूप में पूजे जाने का वरदान दिया तथा कलयुग में सभी की भलाई करने की आज्ञा दी बाबा अमर सिंह ने गुरु गरब से जादू की शिक्षा प्राप्त की और उन्हें अपना गुरु ग्रहण किया और माता नथिया और पांचों बावरी से मिलकर जगत भला किया बाबा अमर सिंह पवन माता नथिया गुरु गोरखनाथ और पांचों बावरी के साथ मंदिर बाबा अमर सिंह पवन की सर्वप्रथम सेवा जैसोर खेड़ हरियाणा के बुरिया मामन ने की और स्वर्गीय श्री रामफल गुरु ने इनका मंदिर यमुना रामघाट वजीराबाद दिल्ली में बनवाया रामफल गुरु जी के सुपुत्र श्री कैली
गुरु जी थे और जुम्मा गुरु ने इनकी एक नई लाइन बनाई और आज भी स्वर्गीय श्री राजेश करोति गुरु की मूर्ति यमुना रामघाट वजीराबाद दिल्ली में स्थापित है यहां हर रविवार मेला भरता है और ज्येष्ठ मास गंगा दशहरा पर सभी भक्त यमुना में स्नान करके बाबा अमर सिंह पवन के दर्शन करते हैं और इसके अतिरिक्त काठा गांव में भी बाबा अमर सिंह पवन का मंदिर है बाबा अमर सिंह पवन जानकारी स्वर्ग श्री भूरिया मामन जी स्वर्गीय श्री रामफल गुरु स्वर्गीय श्री कैली गुरु स्वर्गीय श्री जुम्मा गुरु स्वर्गीय श्री राजेश करोति गुरु स्वर्गीय श्री महेंद्र गुरुजी श्री अशोक चावरिया गुरु उत्तम नगर श्री देवेंद्र बिरला स्वर्गीय श्री ओम प्रकाश गुरु स्वर्गीय श्री बबलू दास गुरु श्री सूरजे गुरु श्री हवा सिंह गुरु श्री अजान कारी उपयुक्त बड़े गुरुओं द्वारा है किसी से भी कैसी भी जानकारी एवं मनगण कहानी का विश्वास नहीं करें एवं गुरुओं द्वारा दी गई जानकारी को ही माने पांच बाबरी वीरों की कहानी एवं जन्म से लेकर मुगलों के युद्ध तक की इतिहास य कहानी हमारे ऐतिहासिक किताबें से एवं हमारे बड़े गुरुओं से ली गई है इस कहानी को ध्यान से जरूर सुने एवं हमारे पांचों वीरों की बलिदान तक का इतिहास जाने और आज भी है वह हमर इस दुनिया में पांच बावरी वीरों का इतिहास पांच बावरी वीरों का इतिहास पांच बावरियों का जन्म माता रानी का चमत्कार खरकरी गांव की दुर्घटना खरकरी गांव की दुर्घटना मुगलों के साथ युद्ध पांच बावरी वीरों का इतिहास पांच बावरियों का इतिहास सैकड़ों पुराना है जब खरकड़ी नामक स्थान राजस्थान में
989 वर्ग में विशाल कबीला फैला हुआ था और संयुक्त कबीला बहुत ही खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहा था इस खुशहाल कबीले के राजा का नाम हेमराज बावरी था जो एक न्यायप्रिय राजा थे और भाई दूस की मदद करने वाले व्यक्ति थे लेकिन इतना खुशहाल राज्य होते हुए भी खरकड़ी के राजा हेमराज हमेशा चिंतित रहते थे क्योंकि उनके कोई संतान नहीं थी हेमराज बावरी की पत्नी
माता कपूरी बहुत बड़ी शिव भगत थी वह अपनी नगरी में आए हुए सभी साधु संतों और गरीब प्रजा की मदद करने में लीन रहती थी उसी समय एक चमत्कार हुआ खरकड़ी गांव में एक साधु अपनी मंडली के साथ आकर डेरा लगाया और वह धूना लगाकर वहां पर बैठ गए जब इस बात का पता महारानी कपूरी को लगा तो वह इनकी शरण में आए और इन जोगियों की मंडली की सेवा पूरी श्रद्धा के साथ की जब माता कपूरी इन नाथ की सेवा करके वापस जा रही थी तब उनकी आंखों में आंसू आ गए तब साधु ने माता कपूरी को दुखी होने का कारण पूछा तब माता कपूरी ने कहा कि इतना विशाल और खुशहाल राज्य होते हुए भी हमारे कोई संतान नहीं है इसके बाद उस साधु ने माता को पूरी को वरदान दिया कि तुम्हारे दो पुत्र होंगे और साथ
ही उ उन्होंने शर्त रखी कि तुम्हें तुम्हारे एक पुत्र को धूने पर चढ़ाना होगा इसके बाद माता कपूरी को नौ महीने बाद दो पुत्र प्राप्त हुए तब माता कपूरी अपने एक पुत्र और अपने पति हेमराज को लेकर उस नाथ जी के पास गई तब साधु ने माता कपूरी को आदेश दिया कि तुम अपने पुत्र को हमारे धुने में चढ़ा दो इसके बाद जोगी की यह बात सुनकर माता कपूरी की आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने अपना वचन याद किया और अपने पुत्र को धोने में डाल दिया माता को पूरी का यह त्याग देख नागे बाबा बहुत ही प्रसन्न हुए और जगते हुए धुने से उस बच्चे को वापस निकालकर माता कपूरी को दे दिया था नागे बाबा की शक्तियों के कारण उस बच्चे को आंच भी नहीं लगी परंतु उस बच्चे का रंग सांवला हो गया था हेमराज ने अपने
इस पुत्र का नाम शेर सिंह रखा था परंतु नागे बाबा ने अपनी शक्तियों और उसके सांवले रंग के कारण उस बच्चे का नाम सांवर सिंह बावरी रख दिया था पांच बावरियों का जन्म इसके बाद नागे बाबा ने माता कपूरी और राजा हेम को उनकी श्रधा से प्रसन्न होकर उन्हें यह वरदान दिया कि तुम्हारी कोक से तीन पुत्र और एक पुत्री का जन्म भी होगा और नागे बाबा ने उन पुत्रों का नामकरण भी किया उन्होंने कहा कि तुम्हारे बड़े पुत्र का नाम हरि सिंह बावरी रखना और दूसरे पुत्र का नाम केसरमल रखना और तीसरे
पुत्र का नाम जीतमल रखना और चौथे पुत्र का नाम नथमन रखना और लड़की का नाम शैडो रखना और यह वरदान भी दिया कि तुम्हारी यह पांचों बावरी जग के कल्याण के लिए जन्म लेंगे और जो भी इनके दर पर कुछ मन्नत मांगेंगे वह उन्हें जरूर पूरी करेंगे और उन्होंने यह भी कहा कि संसार में रहते हुए यह बहुत ही शक्तियों को प्राप्त करने के बाद संसार में अमर हो जाएंगे इसके बाद नागे बाबा मुरथन की तरफ रवाना हो गए इसके बाद नागे बाबा के वरदान के कारण माता कपूरी की कोक से तीन पुत्र और एक पुत्री ने जन्म लिया कुछ समय के बाद पांचों भाई जवान हो गए और उनकी बहन भी जवान हो गई थी
इन पांचों बावरियों में जो का सबसे बड़ा भाई हरि सिंह था वह मंसा देवी का भगत था जब हेमराज अपने वृद्धावस्था में आ गए तब उन्होंने अपना राजपाट अपने सबसे बड़े पुत्र हरि सिंह को सौंप दिया माता रानी का चमत्कार हरि सिंह बावरी को गद्दी संभाले हुए कुछ ही समय हुआ था कि उनके छोटे भाई सागर सिंह और केसरमल ने उनसे शिकार खेलने की आज्ञा मांगी इसके बाद हरी सिंह से आज्या लेकर दोनों भाई शिकार के लिए जंगल की ओर रवाना हो गए जब यह दोनों भाई शिकार खेलने के लिए जा रहे थे तब इन रास्ते में माता मंसा का मंदिर दिखाई देता है और यह हाथ जोड़कर माता से मन्नत मांगते हैं कि हे
माता रानी हम आपको कलश की भेट चढ़ाएंगे यदि आज हमें शिकार मिल जाए तो जब वह जंगल में जाते हैं तब इन्हें वहां पर कोई भी शिकार नहीं मिलता और यह माता रानी से नाराज हो जाते हैं और आते समय माता रानी के मंदिर के ऊपर लगा हुआ कलश उतारने लगते हैं इसके बाद माता रानी ने अपनी शक्तियों से इन दोनों भाइयों को पत्थर का बना दिया था जब इस बात का पता है इनके भाई हरी सिंह को लगा तब वह माता रानी के मंदिर में आकर इनसे क्षमा मांगी लेकिन माता रानी ने उनकी क्षमा स्वीकार नहीं की तब हरि सिंह बावरी ने अपना शीश काटकर माता रानी को भेट चढ़ा दिया था तब मंसा
रानी ने प्रसन्न होकर हरि सिंह को पुनर्जीवित किया और सांवर सिंह बावरी और केसरमल बावरी को पहले जैसा बना दिया और उनकी क्षमा को स्वीकार किया इसके बाद माता मंसा रानी ने इन पांचों भाइयों को दिव्य शक्ति का वरदान दे दिया था खरकड़ी की दुर्घटना फिर इस राज्य में एक दुर्घटना घटी भूकंप आने के कारण पूरा राज्य तहस नहस हो गया था और इस राज्य के साथ-साथ माता कपूरी और राजा हेमराज भी चल बसे थे इस राज्य में कुछ नागरिक और वह पांच भाई और उनकी बहन भी शेष बचे थे कुदरत के इस आपदा को देखकर पांचों भाइयों ने खरकड़ी राज्य छोड़ने का फैसला बना लिया इसके बाद
पांचों भाई और उनकी बहन दिल्ली आकर जमुना किनारे एक झोपड़ी बनाकर रहने लगे जब यह पांचों भाई दिल्ली में आए थे उस समय वहां का शासक नोरंग बादशाह था वह बहुत ही क्रूर राजा था इन पांचों भाइयों को दिल्ली में रहते हुए थोड़ा ही समय हुआ था कि इन्हें एक खून से भरा हुआ पत्थर मिलता है और उसमें लिखा था कि मैं हिंदू लड़की हूं और यह बादशाह मुझे अपनी हवस का शिकार बनाना चाहता है क्या कोई ऐसा शूरवीर है जो मेरी इज्जत को बचा सकता है इस पत्र को पढ़ने के बाद उन पांचों भाइयों को बहुत गुस्सा आया और वह उसी समय चक बेंगलूर की तरफ उस राजा को मार मारने के लिए
निकल पड़े इसके बाद उस राजा को मारकर उस लड़की को छुड़ा लाए और उसे अपनी धर्म की बहन बना लिया पांच बावरियों का इतिहास उस समय का है जब गोगा जी ने अपने दो भाइयों का वध कर दिया था उनकी धध रणभूमि में और उनके सिर राजमहल में गिरे थे गोगा जी के दोनों भाई धोखेबाज थे इन दोनों ने दिल्ली के बादशाह के साथ मिलकर गोगा जी के ऊपर चढ़ाई कर दी थी इस युद्ध में समर सिंह बावरी और केसरमल बावरी ने गोगा जी का साथ दिया था गोगा जी अपने भाइयों का अंतिम संस्कार करना चाहते थे परंतु उनकी माता बाछल बहुत ही गुस्सा थी और गोगा जी को उन्होंने महलों में आने से
इंकार कर दिया था इसके बाद गोगा जी ने सांवर बावरी और केसरमल बावरी को अपने भाइयों का शीष लाने का आदेश दिया उन दोनों भाइयों ने जोड़ जोगन की शक्ति से अदृश्य होकर उनके भाइयों का शीष लाकर गोगा जी को दे दिया इसके बाद गोगा जी ने अपने भाइयों का अंतिम संस्कार किया गोगा जी अवतारी व्यक्ति थे इसके बाद गोगा जी ने सावर सिंह बावरी और केसरमल बा से प्रसन्न होकर उन्हें 5 कल्पों की शक्ति का वरदान दिया और साथ ही उन्हें यह वचन भी दिया कि धर्म की रास्ते पर चलते
हुए यदि तुम में से किसी भी भाई को शीश कट जाए तो मुझे याद कर लेना मैं फिर से तुम्हें सर्जित कर दूंगा मुगलों के साथ युद्ध जिस लड़की को उन्होंने धर्म की बहन बनाया था उसने उन पांच बावरियों को बताया कि बादशाह अपने चारपाई के नीचे सोने की ईट रखकर सोता है और वह कहता है कि जो भी इन ईटों को चुरा लेगा मैं उसे आधा राज्य दे दूं और उससे अपनी बेटी की शादी कर दूंगा इसके बाद नथमल और जीतमल दिल्ली की ओर रवाना हो गए और माता रानी के आशीर्वाद से उन्होंने बादशाह के नीचे से वह सोने की हीट चुरा ली जब इस बात का पता बादशाह को चला तो उसने अपनी सेना की एक टुकड़ी को मर्थल की ओर रवाना कर दी उस समय बावरियों की बहन से शैडो कुवे से पानी भरने के लिए बाहर गई हुई
थी तब मुगलों की सेना ने बावरियों की बहन की इज्जत पर हाथ डाला और जब उन्हें इस बात का पता चला तो उन्होंने बादशाह कुछ टुकड़ी को मार गिराया और कुछ भाग गए इसके बाद बादशाह अपने सभी सैनिकों को लेकर बावरियों से युद्ध करने के लिए आ गया कुछ दिनों के युद्ध के बाद बावरियों के पास हथियार खत्म हो जाते हैं तभी उनकी नजर धुने पर बैठे हुए एक साधु पर पड़ी यह वही साधु थे जिसके वरदान से इन पांचों बावरियों का जन्म हुआ था साधु बाबा उन बावरियों को पहचान लेते हैं इसके बाद उन्हें बताते हैं कि तलाई में पड़ी हुई मिट्टी की छोटी-छोटी गोलियों को तुम अपनी राइफल में भर लेना और
वही बारूद का काम करेगी गोलियों से वह मुगलों से काफी दिन तक मुकाबला करते रहे परंतु मुगलों की सेना अधिक होने के कारण वह ज्यादा देर तक उनका मुकाबला नहीं कर सके इसके बाद उन्होंने नागे बाबा के वरदान को याद किया उन्होंने कहा था कि अपनी बहन बेटियों की इन मुगलों के हाथ कभी भी इज्जत मत जाने देना इसके बाद उन्होंने सबसे पहले अपनी बहन का शीश धर से अलग किया इसके बाद ध्यान नथिया का शीश काट दिया और इसके बाद पांचों भाइयों ने भी अपना शीश काट लिया बावरियों के पांचों शीष मुरथल में ही रह गए थे और उनकी धड़े लड़ते-लड़ते अस्तबली के पास पहुंच गई थी इसके बाद अस्तबली पीर ने पांच बावरियों की वीरता को देखते हुए उनकी धरों को शांत किया और उनको
अपनी शरण में रखा शीष कट जाने के बाद भी पांचों भाई अमरता को प्राप्त हुए थे नथिया माता का इतिहास नथिया माता भगत समाज का सबसे अहम हिस्सा रही है और हमेशा रहेगी माता को कंजर समाज से होने पर भी एक सिद्ध देवी के रूप में पूजा जाता है नथिया माता को एक जादूगरनी से एक चीज देवी बनाने में कई गुरु और सेवा पंथ से गुजरना पड़ा नथिया माई का पूजा स्थान भेट खेड़ा हसनपुर उत्तर प्रदेश माना जाता है क्योंकि यहां माही ने अपने प्रथम गुरु नत्व सपेरा के कहने पर रुकी थी वैसे नथिया माय डाका बंगाला से माया ज्ञान का कुछ पाने से वहां की भी मानी जाती है जिस समय भारत पर मुगलों का शासन
था उस समय मुगल भारतीयों पर इतना अत्याचार करते थे कि जिन्हें सुनकर आज भी रोमते खड़े हो जाते हैं उस समय एक कंजर समाज के व्यक्ति ने मुगलों के विरुद्ध जंग छेड़ दी थी और जो वह व्यक्ति थे वह नथिया के पिताजी थे इनके पिताजी एक लोहार का काम करते थे इनकी बेटी बचपन से ही बहुत गुणवान थी नथिया का बचपन से ही पूजा पाठ में बहुत मन था माता नथिया जैसे-जैसे बड़ी हुई वैसे ही उनकी सुंदरता बढ़ती गई थी वह इतनी सुंदर थी कि जो भी उन्हें देखता था वह उन पर मोहित हो जाता था जब माता नथिया युवावस्था में आई तब उन्होंने मां काली की आराधना की और उन्हें अपनी आराधना से प्रसन्न कर लिया था जब उनकी सुंदरता के बारे में मुगलों को पता चला तो उन्होंने माता नथिया को उठाने का फैसला लिया था
जब यह बात माता नथिया के पिताजी को पता चली तो उन्होंने मुगलों के खिलाफ जंग छेड़ दी थी और इस जंग में नथिया के पिताजी की मौत हो गई थी इसके बाद नथिया ने मुगलों से मुकाबला किया और बहुत से मुगलों को मौत के घाट उतार दिया था यूपी में एक गांव है जहां पर जिनका बहुत ही आंतर हुआ करता था वहां के लोग उस जिन से इतना डरते थे कि रात के समय कोई भी घर से बाहर नहीं निकलता था उस जिन्नात ने एक पूरे परिवार को भी खत्म कर दिया था उस परिवार में केवल एक स्त्री बची थी जहां पर जिन्नात रात्रि को जाया करता था वह घर ही उसका ठिकाना बन गया था एक रात उस गांव में एक भगत आता है और वह ठहरने के लिए स्थान मांगता है वह कहता है कि मुझे आज की रात के लिए कोई स्थान दे दीजिए क्योंकि मैं रात के समय कहीं भी अब नहीं जा सकता तभी सारे गांव के लोग उस भगत को उस जिन्न के बारे में बताते हैं
सभी लोग उसको जिन्नात की पूरी घटना के बारे में बताते हैं वह व्यक्ति माता नथिया का भगत होता है और वह निश्चय करता है कि यह सब वह अपनी आंखों से देखना चाहता है इसके बाद वह भगत उस घर का पता लेता है जहां पर जिन्ना था रात्रि को आता था जब वह भगत है उस घर में जाता है तो रास्ते में उसे वह हिस्ट्री मिलती है और उससे कहता है कि कृपया मुझे आज रात के लिए यहां पर थोड़ा सा स्थान दे दीजिए वह स्त्री उसे चे चेतावनी देती है कि कृपया आप यहां से चले जाइए यदि आप यहां से नहीं गए तो वह जिन्नात आपको मार डालेगा इसके बाद वह भगत उस स्त्री से अंदर जाने की अनुमति मांग लेता है
और उससे एक खाट और एक साड़ी मांगता है इसके बाद वह स्त्री उसे एक साड़ी और एक खाट दे देती है इसके बाद वह भगत घर के बाहर खाट को डाल देता है और उस साड़ी से एक औरत का पुतला बनाकर उसे खाट के पास रख लेता है जब आधि रात्रि का समय होता है तो वह जिन्नात वहां पर आता है और वह उस व्यक्ति से कहता है कि तुम यहां से चले जाओ वरना तुम्हारा भी वही हाल होगा जो और लोगों का हुआ था इसके बाद वह व्यक्ति वहां से जाने के लिए मना कर देता है उसकी बात को सुनकर जिन्नात गुस्से से उसे मारने के लिए उसकी तरफ बढ़ता है तब वह पुतला एक औरत का रूप धारण कर लेता है
वह औरत माता नथिया थी माता नथिया ने उस जिन्नात को इतना मारा और उसे मारते हुए गांव के बीच में ले गई जब सभी लोगों ने यह नजारा देखा तब माता की असीम कृपा को देखकर सभी लोग लोग आश्चर्य चकित हो जाते हैं इसके बाद वह जिन गांव से बाहर चला जाता है और आज तक उस जिन का कोई भी पता नहीं है आज उस गांव के लोग स्वतंत्र और निर्भय घूम रहे हैं जब यह सब घटना समाप्त होती है तब पूरा गांव उस भगत का धन्यवाद करता है कि उन्होंने माता नथिया की असीम कृपा से किस प्रकार पूरे गांव को उस जिन से मुक्ति दिलाई थी जब वह भगत जाने लगता है तो पूरा गांव उससे उस स्त्री से शादी करने का प्रस्ताव रखता है और वह भगत उसे स्वीकार कर लेता है आज भी उस भगत का परिवार उस गांव में निवास करता है
जब पांचों बावरी गोगा जी के वरदान से सामर्थ्य हो जाते हैं गोगा जी ने सब सिंह और केसरमल को वरदान दिया था कि धर्म की रक्षा के लिए यदि तुम्हारे सिर भी कट जाए तो तुम मुझे याद कर लेना मैं उन्हें फिर से जोड़ दूंगा एक बार सबल सिंह के स्वपन में माय श्याम है और वह उनसे कहती है कि तुम पांचों भाई तो समर्थ गए हो और मुझे डाका बंगला में छोड़ आए हो मेरी आत्मा आज भी वहीं पर तड़प रही जब सबल सिंह की आंखें खुलती है तब उन्हें अपनी गलती का एहसास होते हैं और वह माता मसानी की आराधना करते हैं धन्यवाद मित्रों को मैं आशा करता हूं कि आपने यह हमारी रोचक कथा एवं जानकारी सही से सुनी होगी
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