माता लक्ष्मी के 9 उपाय 🕉️

 




जैसे होगी मां लक्ष्मी प्रसन्न आई शुरू करते हैं अपनी यह रहस्य भरी एवं महत्त्वपूर्ण कथा ऐसे और भी रोचक कथा एवं कहानी सुनाने के लिए हमारे ए स्टोरी चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें मां लक्ष्मी की कृपा से जीवन में सुख शांति समृद्धि धन और ऐश्वर्य प्राप्त होता है लेकिन जब 


तक मां लक्ष्मी की कृपा ना हो इन सभी सुखों एवं शुभता की प्राप्ति संभव नहीं है इसलिए अगर आप भी चाहते हैं कि आपके जीवन में समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहे तो जानिए यह नौ पाय एक शुक्रवार के दिन सुबह उठते ही मां लक्ष्मी को नमन कर स्नान कर स्वच सफेद या गुलाबी वस्त्र धारण करें इसके बाद श्री यंत्र व मां लक्ष्मी के चित्र के सामने खड़े होकर श्री सूक्त का पाठ करें अगर संभव


हो तो कमल का पुष्प मां लक्ष्मी को अर्पित करें दो जब भी घर से किसी भी खास काम से निकले तो निकलने से पहले थोड़ा मीठा दही खाकर निकले तीन अगर आपके काम में अवरोध आ रहा है तो शुक्रवार के दिन काली चीटियों को चीनी डालें चार शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी के मंदिर जाकर शंख कोरी कमल मखाना बताशा अर्पित करें यह सब महालक्ष्मी मां को बहुत प्रिय है पांच अगर पति पत्नी में तनाव रहता है तो शुक्रवार के दिन अपने शयन कक्ष में प्रेमी पक्षी जोड़े की तस्वीर लगाएं छह घर में स्थाई सुख समृद्धि


 हेतु पीपल के वृक्ष की छाया में खड़े रहकर लोहे के बर्तन में जल चीनी घी तथा दूध मिलाकर पीपल के वृक्ष की जड़ में डालने से घर में लंबे समय तक सुख समृद्धि रहती है और लक्ष्मी का वास होता है साथ घर में बार-बार धन हानि हो रही हो तो के मुख्य द्वार पर गुलाल छिड़क कर गुलाल पर शुद्ध घी का दो मुखी दीपक जलाना चाहिए दीपक जलाते समय मन ही मन यह कामना करनी चाहिए कि भविष्य 


में घर में धन हानि का सामना ना करना पड़े जब भी पक्ष शांत हो जाए तो उसे बहते हुए पानी में बहा देना चाहिए आठ संपत्ति और संतान की प्राप्ति चाहते हैं तो गजलक्ष्मी मां की उपासना करें इससे संतान की प्राप्ति भी होगी और संपत्ति में भी बढ़ोतरी होती है नौ घर में या बाहर कहीं भी अन्न का अपमान न करें और नहीं होने दे जो लोग भी क्रोध में आकर खाने से सजी थाली फेंकते हैं उनके घर कभी धन वैभव 


और सुख नहीं रहता माता लक्ष्मी का परिचय ऋषि भरि गुू की पुत्री माता लक्ष्मी थी उनकी माता का नाम ख्याति था समुद्र मंथन के बाद शीर सागर से जो लक्ष्मी उत्पन्न हुई थी उसका इनसे कोई संबंध नहीं हालांकि उन महालक्ष्मी ने स्वयं ही विष्णु को वर लिया था महर्षि भरि गुुुू और शिव के साव थे महर्षि भरेगी सप्तर्षियों में स्थान मिला है राजा दक्ष के भाई भरेगी थे इसका मतलब राजा दक्ष की भतीजी थी माता 


लक्ष्मी के दो भाई दाता और विधाता थे भगवान शिव की पहली पत्नी माता सती उनकी लक्ष्मी जी की सौतेली बहन थी सती राजा दक्ष की पुत्री थी माता लक्ष्मी के 18 पुत्रों में से प्रमुख चार पुत्रों के नाम हैं आनंद कर्दम श्री चिकली माता लक्ष्मी को दक्षिण भारत में श्रीदेवी कहा जाता है लक्ष्मी विष्णु विवाह कथा जब लक्ष्मी जी बड़ी हुई तो वह भगवान नारायण के गुण प्रभाव का वर्णन सुनकर उनमें ही अनुरक्त हो गई और उनको पाने के लिए तपस्या करने लगी उसी तरह जिस तरह पार्वती जी ने शिव को पाने के लिए तपस्या की



 थी वे समुद तट पर भन तपस्या करने लगी तदनंतर लक्ष्मी जी की इच्छानुसार भगवान विष्णु ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया दूसरी विवाह कथा एक बार लक्ष्मी जी के लिए स्वयंवर का आयोजन हुआ माता लक्ष्मी पहले ही मन ही मन विष्णु जी को पति रूप में स्वीकार कर चुकी थी लेकिन नारद मुनि भी लक्ष्मी जी से विवाह करना चाहते थे थे नारद जी ने सोचा कि यह राजकुमारी हरि रूप पाकर ही उनका वरंग करेगी तब नारद जी विष्णु भगवान के पास हरि के समान सुंदर रूप मांगने पहुंच गए विष्णु भगवान ने नारद की इच्छा के अनुसार उन्हें हरि रूप दे दिया हरि रूप लेकर जब नारद राजकुमारी के स्वयंवर में पहुंचे तो उन्हें विश्वास था कि राजकुमारी उन्हें ही वरमाला पहनाए गी लेकिन ऐसा नहीं हुआ राजकुमारी ने नारद को छोड़कर



 भगवान विष्णु के गले में वरमाला डाल दी नारद वहां से उदास होकर लौट रहे थे तो रास्ते में एक जलाशय में अपना चेहरा देखा अपने चेहरे को देखकर नारद हैरान रह गए क्योंकि उनका चेहरा बंदर जैसा लग रहा था हरि का एक अर्थ विष्णु होता है और एक वानर होता है भगवान विष्णु ने नारद को वानर रूप दे दिया था नारद समझ गए कि भगवान विष्णु ने उनके साथ छल किया उनको भगवान पर बड़ा क्रोध आया नारद सीधा बैकुंठ पहुंचे और आवेश में आकर भगवान को श्राप दे दिया कि आपको मनुष्य रूप में जन्म लेकर पृथ्वी पर जाना होगा जिस तरह मुझे स्त्री का वियोग सहना पड़ा है उसी प्रकार आपको भी वियोग सहना


 होगा इसलिए राम और सीता के रूप में जन्म लेकर विष्णु और देवी लक्ष्मी को वियोग सहना पड़ा समुद्र मंथन वाली लक्ष्मी समुद्र मंथन से उत्पन्न लक्ष्मी को कमला कहते हैं जो 10 महाविद्याओं में से अंतिम महाविद्या है देवी कमला जगत पालनकर्ता भगवान विष्णु की पत्नी है देवताओं तथा दानवों ने मिलकर अधिक संपन्न होने हेतु समुद्र का मंथन किया समुद्र मंथन से 18 रत प्राप्त हुए जिन में देवी लक्ष्मी भी थी जिन्हें भगवान विष्णु को प्रदान किया गया तथा उन्होंने देवी का पानी ग्रहण किया देवी का घनिष्ठ संबंध देवराज


 इंद्र तथा कुबेर से हैं इंद्र देवताओं तथा स्वर्ग के राजा हैं तथा कुबेर देवताओं के खजाने के रक्षक के पद पर आसीन हैं देवी लक्ष्मी ही इंद्र तथा कुबेर को इस प्रकार का वैभव राजसी सत्ता प्रदान करती है धन्यवाद सभी मित्रों को मैं आशा करती हूं आप सभी को य कथा एवं उपाय महत्त्वपूर्ण लगे होंगे ऐसे और भी रोचक कहानी के लिए हमारे एमस स्टोरी चैनल को सब्सक्राइब करें कमेंट में जय मां लक्ष्मी श्री नारायण जरूर लिखें 

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