बाबा अमर सिंह पवन माता नथिया की अमर कहानी


नमस्कार सभी दोस्तों को आप सभी का स्वागत है हमारे एम स्टोरी चैनल पर तो आज हम आपको एक नई कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि शिव भगवान के बालरूप बाबा अमर सिंह पवन के बारे में है आइए जानते हैं इस कहानी में बाबा अमर सिंह पवन के जीवन से जुड़ी हुई कुछ अनसुनी कहानियां और इसके साथ ही माता नथिया की भी अनसुनी कहानी आपको सुनने को मिलेगी तो दोनों कहानी आप ध्यान से सुने और सभी भक्तों के पास शेयर जरूर करें चलिए शुरू करते हैं 

बाबा अमर सिंह पवन का इतिहास बाबा अमर सिंह पवन का इतिहास बाबा अमर सिंह पवन का जन्म बाबा अमर सिंह पवन के गुरु बाबा अमर सिंह पवन की सेवा बाबा अमर सिंह पवन का जन्म बाबा अमर सिंह पवन भगवान शिव के बाल रूप में पूजे जाते हैं जिस प्रकार भगवान श्री कृष्ण का बाल रूप लड्डू गोपाल है उसी प्रकार भगवान शिव का बालरूप बाबा अमर सिंह पवन है इनकी माता का नाम मिश्री देवी है जब बाबा अमर सिंह पवन किसी भगत के शिश पर सवार होते हैं तो यह अपनी माता मिश्री का जयकारा जरूर लगाते हैं जब बाबा अमर सिंह पवन का जन्म हुआ तब इनके परिवार में खुशी का कोई भी ठिकाना नहीं रहा जब बाबा अमर सिंह पवन पाच वर्ष के हुए तब इनकी माता मिश्री इन्हें अपने साथ 


खेत में लेकर गई थी इनकी माता जी ने इन्हें किसी स्थान पर अकेला छोड़कर अपने कार्य में लग गई थी तभी वहां पर एक काला सर्प आता है और वह बाबा अमर सिंह पवन के माथे में अपना डंक मारकर उनके अंदर अपना जहर छोड़ देता है और बाबा अमर सिंह पवन बेहोश हो जाते हैं कुछ समय बाद ही बाबा अमर सिंह पवन की जहर के कारण मृत्यु हो गई थी इनकी मृत्यु के बाद गांव वालों ने इन्हें जलाने के लिए कहा तब इनकी माता मिश्री ने इन्हें जलाने के लिए मना कर दिया और इन्हें 

जमुना में बहा दिया था जब बाबा अमर सिंह पवन बहता हुआ नदी के किनारे पर पहुंचा उस किनारे पर माता नथिया अपनी तपस्या कर रही थी और उन्होंने इन्हें देखकर बाहर निकाल लिया और इनका पालन पोषण किया माता नथिया माता हिंगलाज की बहुत बड़ी भगत थी और साथ ही वह बंगाल की बहुत बड़ी जादूगरनी थी माता नथिया का संबंध कंजर समाज से है आज के समय में नथिया माता को एक बहुत बड़ी शक्ति के रूप में पूजा जाता है जब नथिया माय अमर सिंह पवन को लेकर 


अपने आराध्य देवी हिंगलाज के पास गई तब माता हिंगलाज ने प्रकट होकर अमर सिंह पवन का जहर निकालकर उन्हें फिर से जीवित कर दिया था माना जाता है कि माता हिंगलाज ने ही इन्हें अमरता का वरदान प्रदान किया था इसी कारण से इनका नाम अमर पड़ा था इसके बाद माता नथिया ने इनका बहुत ही लाड प्यार से पालन पोषण किया बाबा अमर सिंह पवन के गुरु जब यह शिक्षा के योग्य हुए तब इन्हें गुरु नाथ के पास भेजा गया और माता नथिया ने इन्हें कहा कि जब तुम गुरु गोरखनाथ के पास जाओ तब हट कर के बैठ जाना कि मुझे पांच वीर चाहिए जब यह गुरु गोरखनाथ के पास पहुंचे तब गुरु गोरखनाथ अपनी तपस्या में लीन थे और उन्होंने इन्हें कहा कि बच्चे हट मत कीजिए और मुझे अपनी तपस्या करने दीजिए तब अमर सिंह पवन रोने लग गए और जिद करने लगे कि मुझे पांच वीर ही चाहिए इसके बाद गुरु गोरखनाथ


 ने इनकी जिद को देखकर इन्हें पांच वीर प्रदान किए और इनसे वचन लिया कि आप कभी भी जीवन में कोई गलत काम नहीं करोगे गुरु गोरखनाथ से शिक्षा ग्रहण करने के बाद माता नथिया ने इन्हें तंत्र मंत्र की शिक्षा भी प्रदान की थी इसके बाद अमर सिंह पवन भगवान शिव के पास कैलाश पर्वत पर पहुंचे और उन्हें तपस्या से उठाने का प्रयास करने लगे दिव्य शक्तियों के कारण इनकी मन की गति बहुत अधिक तेज हो गई थी अपने मन की गति के कारण यह कहीं भी आ जा सकते थे जब भगवान शिव अपनी तपस्या से नहीं उठे तब इन्होंने भगवान शिव के केस को खींच लिया और भगवान शिव क्रोधित होकर इन



 पर वार करने ही वाले थे कि उन्होंने कि यह एक छोटा सा नन्ना सा बालक है जब भगवान शिव अपनी तपस्या में लीन थे तब बाबा अमरनाथ ने ओम शब्द का उच्चारण किया था इनके इसी तपस्या को देखकर भगवान शिव ने इन्हें वरदान मांगने के लिए कहा इसके बाद भगवान शिव ने अमर सिंह पवन को 14 कलाओं का वरदान दिया था बाबा अमर सिंह पवन 14 कलाओं से सुशोभित है जब भी अमर सिंह पवन की पूजा होती है तो इनके साथ इनकी माता नथिया की भी पूजा होती है और यह पांचों बावरी इनके साथ हमेशा रहते हैं पांचों बावरी माता नथिया को अपनी बहन मानते थे जिस कारण से बाबा अमर सिंह पवन के वह मामा लगते थे जब भी बाबा अमर सिंह पवन का भोग लगता है तो साथ ही पांचों बावरियों का भी भोग


 लगाया जाता है जब बाबा अमर सिंह पवन चलते हैं तो इनके साथ कई अद्भुत दिव्य शक्तियां भी चलती है माना जाता है कि जिस घर में बाबा अमर सिंह पवन की पूजा होती है उस घर में कभी भी नकारात्मक शक्ति प्रवेश नहीं करती आज के समय में जमुना जी के घाट पर इनका एक मंदिर स्थापित है जहां पर लाखों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं इनका मुख्यत भोग जलेबी और दूध का है क्योंकि इन्हें जलेबी और दूध सर्वप्रिय है नथिया माता का इतिहास नथिया माता भगत समाज का सबसे 


अहम हिस्सा रही है और हमेशा रहेगी माता को कंजर समाज से होने पर भी एक सिद्ध देवी के रूप में पूजा जाता है नथिया माता को एक जादूगरनी से एक देवी बनाने में कई गुरु और सेवा पंथ से गुजरना पड़ा नथिया माय का पूजा स्थान भेट खेड़ा हसनपुर उत्तर प्रदेश माना जाता है क्योंकि यहां माता ने अपने प्रथम गुरु नत्व सपेरा के क ने पर रुकी थी वैसे नथिया माय डाका बंगाला से माया ज्ञान पाने से वहां की भी मानी जाती है जिस समय भारत पर मुगलों का शासन था उस समय मुगल भारतीयों पर इतना अत्याचार करते थे कि जिन्हें सुनकर आज भी रोते खड़े हो जाते हैं उस समय एक कंजर समाज के व्यक्ति ने मुगलों के 


विरुद्ध जंग छेड़ दी थी और जो वह व्यक्ति थे वह नथिया के पिताजी थे इनके पिताजी एक लोहार का काम करते थे इनकी बेटी बचपन से ही बहुत गुणवान थी नथिया का बचपन से ही पूजा पाठ में बहुत मन था माता नथिया जैसे-जैसे बड़ी हुई वैसे ही उनकी सुंदरता बढ़ती गई थी वह इतनी सुंदर थी कि जो भी उन्हें देखता था वह उन पर मोहित हो जाता था जब माता नथिया युवावस्था में आई तब उन्होंने मां काली की आराधना की और उन्हें अपनी आराधना से प्रसन्न कर लिया था जब उनकी सुंदरता के बारे में मुगलों को पता चला तो उन्होंने माता नथिया को उठाने का फैसला लिया था जब यह बात माता नथिया के पिताजी को पता चली तो उन्होंने मुगलों के खिलाफ जंग छेड़ दी थी और इस जंग में नथिया के पिताजी की मौत हो


 गई थी इसके बाद नथिया ने मुगलों से मुकाबला की किया और बहुत से मुगलों को मौत के घाट उतार दिया था माता नथिया का चमत्कार यूपी में एक गांव है जहां पर जिनका बहुत ही आंतक हुआ करता था वहां के लोग उस जिन से इतना डरते थे कि रात के समय कोई भी घर से बाहर नहीं निकलता था उस जिन्नात ने एक पूरे परिवार को भी खत्म कर दिया था उस परिवार में केवल एक स्त्री बची थी जहां पर जिन्नात रात्रि को जाया करता था वह घर ही उसका ठिकाना बन गया था एक रात उस गांव में


 एक भगत आता है और वह ठहरने के लिए स्थान मांगता है वह कहता है कि मुझे आज की रात के लिए कोई स्थान दे दीजिए क्योंकि मैं रात के समय कहीं भी अब नहीं जा सकता तभी सारे गांव के लोग उस भगत को उस जिन के बारे में बताते हैं सभी लोग उसको जिन्नात की पूरी घटना के बारे में बताते हैं वह व्यक्ति माता नथिया का भगत होता है और वह निश्चय करता है कि यह सब वह अपनी आंखों से देखना चाहता है इसके बाद वह भगत उस घर का पता लेता है जहां पर जिन्ना थ रात्रि को आता था जब वह भगत उस घर में जाता है तो रास्ते में उसे वह स्त्री मिलती है और उससे कहता है कि कृपया मुझे आज रात के लिए यहां पर थोड़ा सा स्थान दे दीजिए वह स्त्री उसे चेतावनी देती है कि कृपया आप यहां से चले जाइए यदि आप यहां से 



नहीं गए तो वह जिन्नात आपको मार डालेगा इसके बाद वह भगत उस स्त्री से अंदर जाने की अनुमति मांग लेता है और उससे एक खाट और एक साड़ी मांगता है इसके बाद वह स्त्री उसे एक साड़ी और एक खाट दे देती है इसके बाद वह भगत घर के बाहर खाट को डाल देता है और उस साड़ी से एक औरत का पुतला बनाकर उसे खाट के पास रख लेता है जब आधी रात्रि का समय होता है तो वह जिन्नात वहां पर आता है और वह उस व्यक्ति से कहता है कि तुम यहां से चले जाओ वरना तुम्हारा भी वही हाल होगा जो और लोगों का हुआ था इसके बाद वह व्यक्ति वहां से जाने के लिए मना कर देता है उसकी बात को सुनकर जिन्नात गुस्से से उसे मारने के लिए उसकी तरफ बढ़ता है तब वह पुतला एक औरत का रूप धारण कर लेता है


 वह औरत माता नथिया थी माता नथिया ने उस जिन्नात को इतना मारा और उसे मारते हुए गांव के बीच में ले गई जब सभी लोगों ने यह नजारा देखा तब माता की असीम कृपा को देखकर सभी लोग आश्चर्य चकित हो जाते हैं इसके बाद वह जिन गांव से बाहर चला जाता है और आज तक उस जिन का कोई भी पता नहीं है आज उस गांव के लोग स्वतंत्र और निर्भय घूम रहे हैं जब यह सब घटना समाप्त होती है 


तब पूरा गांव उस भगत का धन्यवाद करता है कि उन्होंने माता नथिया की असीम कृपा से किस प्रकार पूरे गांव को उस जिन से मुक्ति दिलाई थी जब वह भगत जाने लगता है तो पूरा गांव उससे उस स्त्री से शादी करने का प्रस्ताव रखता है और वह भगत उसे स्वीकार कर लेता है आज भी उस भगत का परिवार उस गांव में निवास करता है माता नथिया की चौकी जब पांचों बावरी गोगा जी के वरदान से सामर्थ्य हो 


जाते हैं गोगा जी ने सब सिंह और केसरमल को वरदान दिया था कि धर्म की रक्षा के लिए यदि तुम्हारे सिर भी कट जाए तो तुम मुझे याद कर लेना मैं उन्हें फिर से जोड़ दूंगा एक बार सबल सिंह के स्वपन में माता नाथ आती है और वह उनसे कहती है कि तुम पांचों भाई तो समर्थ गए हो और मुझे डाका बंगाला में छोड़ आए हो मेरी आत्मा आज भी वहीं पर तड़प रही है जब सबल सिंह की आंखें खुलती है तब उन्हें अपनी गलती का एहसास होते हैं और वह माता मसानी की आराधना करते हैं माता मसानी की इतनी तपस्या करते हैं कि माता मसानी उन्हें साक्षात दर्शन देती है और उनकी भक्ति से प्रसन्न हो जाती है तब सबल माता मसानी से प्रार्थना करते हैं कि मैं माता नथिया और माता शैडो को सामर्थ्य कराना चाहता हूं इसके बाद माता मसानी सबल सिंह को वचन दे देती है कि वह माता नथिया और माता शैडो को सामर्थ्य कराएगी इसके बाद अपने वचन के 



अनुसार माता मसानी सबसे पहले माता नथिया को जीवित करती है और अपनी दिव्य शक्ति प्रदान करके माता नथिया को नत गुरु के पास विद्या सीखने के लिए भेज देती है और श्याम कौर को मर्थल से जीवित करके मर्थल में बने हरि सिंह के मंदिर में बिठा देती है और उनसे कहती है कि तुम्हारे भाई तुम्हें यहीं पर लेने के लिए आएंगे इसके बाद माता मसानी अंतरध्यान हो जाती है इसके बाद माता नथिया मसानी के कहे अनुसार विद्या सीखने के लिए धाका बंगाल की ओर रवाना हो जाती है वहां पहुंचने के बाद माता नथिया ने नत गुरु से तांत्रिक की विद्या ग्रहण की थी धन्यवाद दोस्तों आप सभी को यहां पर 


माता नथिया एवं बाबा अमर सिंह पवन की कहानी एवं कथा सुनने को मिली थी और इस चैनल को ऐसी ही रोचक कहानी सुनाने के लिए लाइक शेयर सब्सक्राइब जरूर करें नोटिफिकेशन को पर सेट रखें और कमेंट में जय बाबा अमर सिंह पवन जय नथिया माता जरूर लिखें और पांचो बाबरी की भी कहानी बहुत जल्द हमारे इस चैनल पर आपके सामने आ जाएगी तो उसके लिए आपको नो नोटिफिकेशन बेल आइकन को ऑल पर सेट रखना पड़ेगा सब्सक्राइब करके [संगीत] धन्यवाद 



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