श्री कृष्ण की सीख 🪔 ll मरे हुए लोगों की तीन चीजें कभी न लें 🔥
श्री कृष्ण की सीख 🪔 ll मरे हुए लोगों की तीन चीजें कभी न लें 🔥
[संगीत] श्री कृष्ण कहते हैं मरे हुए लोगों की तीन चीजें कभी नहीं लेनी चाहिए आए फिर सुनते हैं बिना किसी देरी के इस कहानी कथा के माध्यम से आज आपको कुछ ऐसी रहस्य भरी एवं रोचक जानकारी प्राप्त होगी जो आपने कभी सुनी नहीं होगी तो लिए सुनते हैं ऐसी ही हिंदू धर्म की जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारे एमएस स्टोरी चैनल को सब्सक्राइब अवश्य करें कई वर्षों पहले वृंदावन के एक छोटे से गांव में एक साधु का आगमन हुआ साधु ने गांव के एक कोने में अपना डेरा जमाया उसकी दिव्य उपस्थिति ने लोगों को आकर्षित किया साधु के पास जाकर लोग उनसे जीवन के कई सवाल पूछते और वह बड़े
प्रेम से सबको उत्तर देते एक दिन गांव का एक युवा अर्जुन साधु के पास पहुंचा और बोला गुरुदेव मैंने सुना है कि श्री कृष्ण ने कहा है कि मरे हुए लोगों की तीन चीजें कभी नहीं लेनी चाहिए क्या यह सच है और अगर सच है तो क्यों साधु मुस्कुराए और बोले अर्जुन यह बात श्री कृष्ण ने बहुत गहरी समझ के साथ कही है आओ मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूं जिससे तुम्हें इसका महत्व समझ में आएगा अर्जुन ने ध्यान से सुनने का निश्चय किया साधु ने कहना शुरू किया बहुत समय पहले एक राजा था उसका
नाम था ध्रुव राजा वह बहुत पराक्रमी और समृद्ध राजा था परंतु उसका मन हमेशा अधीर रहता एक दिन एक युद्ध में उसकी मृत्यु हो गई राजा की की मृत्यु के बाद उसका पुत्र सिंहासन पर बैठा राजा के पुराने कपड़े आभूषण और ताबीज उसके पुत्र ने संभाल लिए परंतु क्या हुआ अर्जुन वह पुत्र धीरे-धीरे बीमार पड़ने लगा उसे अजीब सपने आने लगे उसने देखा कि उसके पिता उससे कहते हैं
मेरी चीजें मेरे पास ही रहने दो पुत्र ने इन सपनों की अनदेखी की और वस्त्र और आभूषण पहनता रहा उसकी तबीयत और बिगड़ती गई अंत में उसने साधुओं से सलाह ली साधु की बात सुनकर अर्जुन बेचैन होकर बोला फिर क्या हुआ गुरुदेव साधु ने गहरी सांस ली और कहा साधुओं ने कहा राजा की पुरानी चीजें लौटा आओ मरे हुए लोगों की तीन चीजें उनका वस्त्र उनके आभूषण और उनकी ताबीज कभी नहीं लेनी चाहिए यह उनकी ऊर्जा से भरी होती है जीवित लोग उस ऊर्जा को सहन नहीं कर सकते पुत्र ने जैसे ही उन चीजों को जल में विसर्जित किया उसकी सेहत धीरे-धीरे सुधरने लगी उसे समझ आया कि मरे हुए लोगों की चीजें उनके साथ ही जानी चाहिए अर्जुन की आंखों में जिज्ञासा थी उसने पूछा लेकिन गुरुदेव
इसका गुण अर्थ क्या है साधु ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया श्री कृष्ण ने हमें यह सिखाने का प्रयास किया है कि मरे हुए व्यक्ति की ऊर्जा उनकी चीजों में समाहित रहती है जब हम उन्हें अपने पास रखते हैं तो वह ऊर्जा हमारी जीवंत ऊर्जा के साथ संघर्ष करती है इसीलिए मरे हुए व्यक्ति की चीजों को सम्मान पूर्वक त्यागना चाहिए ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले और हमारी ऊर्जा प्रभावित ना हो अर्जुन ने सिर झुकाकर कहा अब मैं समझ गया गुरुदेव श्री कृष्ण का यह उपदेश हमारी भलाई के लिए है मैं इसे अपने जीवन में अपना हंगा साधु ने सिर हिलाकर कहा अर्जुन याद रखना जीवन में ज्ञान का महत्व तब बढ़ता है जब हम उसे समझकर अपनाते हैं मरे हुए लोगों की तीन चीजें कभी मत लेना क्योंकि यह ना केवल उनका
सम्मान है बल्कि हमारी शांति का भी स्रोत है उस दिन से अर्जुन ने श्री कृष्ण की इस सीख को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया और गांव के सभी लोगों को भी इसके महत्व को समझाया गांव में एक नया संदेश फैल गया मरे हुए लोगों की चीजों का सम्मान करो परंतु उन्हें अपने जीवन में स्थान मत दो गांव के लोग साधु को धन्यवाद देने पहुंचे लेकिन साधु कहीं गायब हो चुके थे लोग मानते हैं कि वह साधु स्वयं श्री कृष्ण का ही एक रूप थे जो उन्हें एक महत्त्वपूर्ण संदेश देने आए थे गांव में नई चुनौती मरे हुए राजा की रहस्यमई तलवार साधु के जाने के बाद गांव में श्री कृष्ण की उस सीख का बड़ा सम्मान होने लगा लोग
मरे हुए लोगों की चीजों को सावधानी से त्यागने लगे कुछ महीनों बाद गांव में एक नया संकट आ गया गांव के पास स्थित पुराने किले में एक प्राचीन खजाना मिला उस खजाने में एक सोने की चमचमाती तलवार थी गांव के बड़े बुजुर्ग बर्गों ने बताया कि यह तलवार पुराने राजा ध्रुव राज की है जिनकी कहानी अर्जुन ने सुन रखी थी तलवार पर बेशकीमती रत्न जड़े हुए थे और उसकी चमक इतनी थी कि देखने वालों की आंखें चौध आ जाती गांव के सरपंच ने कहा यह तलवार हमारे गांव के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है हम इसे अपने मंदिर में रखेंगे इससे हमारा गांव समृद्ध होगा लेकिन अर्जुन ने जो अब गांव का प्रमुख सलाहकार बन चुका था श्री कृष्ण की सीख याद दिलाई उसने कहा मरे हुए लोगों की चीजें अपने पास रखना शुभ नहीं है यह तलवार भी नहीं रखनी चाहिए सरपंच ने उसकी बात को नजरअंदाज कर दिया और हंसी में उड़ा दिया
अर्जुन यह तलवार खजाना है हमारे लिए वरदान है इससे हमारे गांव का कल्याण होगा अर्जुन ने कई बार समझाने की कोशिश की लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी तलवार को गांव के मंदिर में स्थापित कर दिया गया कुछ ही दिनों बाद अजीब घटनाएं होने लगी मंदिर के पुजारी ने बताया रात को मंदिर में अजीब आवाजें आती हैं ऐसा लगता है जैसे कोई तलवार चलाता है गांव के कुछ लोग डरने लगे लेकिन कुछ ने इसे राजा ध्रुवराज की रक्षा का आशीर्वाद मान लिया फिर एक दिन गांव के मुख्य व्यापारी के घर में आग लग गई किसी को समझ में नहीं आया कि आग कैसे लगी उसी रात मंदिर के पुजारी ने एक
भयानक सपना देखा सपने में उसने देखा कि राजा ध्रुव राज क्रोधित होकर कह रहे हैं मेरी तलवार लौटा आओ वरना इस गांव को श्राप मिलेगा पुजारी ने सुबह होते ही गांव वालों को यह बात बताए अब सबकी नजर अर्जुन पर थी सरपंच ने झुंझला हुए कहा तुम्हें तो पहले से ही सब पता था अर्जुन बताओ अब क्या करना चाहिए अर्जुन ने गंभीरता से कहा श्री कृष्ण की सीख याद करो हमें राजा की तलवार का उचित सम्मान करते हुए उसे वापस जल में विसर्जित करना चाहिए यह उनकी आत्मा की शांति के लिए आवश्यक है सरपंच ने इस बार अर्जुन की बात मानने का निश्चय किया गांव के लोग नदी के किनारे इकट्ठा हुए उन्होंने मंत्रों के साथ तलवार का विसर्जन किया जैसे ही तलवार जल में समा गई नदी का पानी शांत हो गया अजीब
आवाजें बंद हो गई और गांव की मुसीबतें भी कम होने लगी उस रात अर्जुन ने एक सपना देखा सपने में एक दिव्य आकृति प्रकट हुई वह आकृति राजा ध्रुवराज की थी उन्होंने अर्जुन से कहा तुम्हारी समझदारी और श्री कृष्ण की शिक्षा के प्रति निष्ठा ने मेरी आत्मा को शांति दी है मैं तुम सबका आभारी हूं अर्जुन ने हाथ जोड़कर कहा महाराज हमें क्षमा करें हम आपकी चीजों को अपने पास रखकर अनजाने में आपकी शांति में विघ्न डाल रहे थे हम अब कभी ऐसा नहीं करेंगे राजा ध्रुवराज ने मुस्कुराते हुए कहा तुम्हारे इस कार्य से तुम्हारे गांव को सदा सुख शांति मिलेगी और ऐसा कहकर राजा की आकृति धुंधली होती चली
गई और अदृश्य हो गई अर्जुन ने उस अनुभव से यह समझा कि श्री कृष्ण की हर शिक्षा का एक गहरा अर्थ होता है उसने गांव के लोगों से कहा याद रखो मरे हुए लोगों की चीजों का सम्मान करो पर उन्हें अपने जीवन का हिस्सा मत बनाओ यह ना केवल उनकी आत्मा की शांति के लिए है बल्कि हमारी सुरक्षा के लिए भी गांव में अब शांति लौट आए थी लोग अर्जुन की समझदारी का आदर करने लगे और श्री कृष्ण की सीख का पालन करने लगे अर्जुन ने अपने अनुभवों से गांव के बच्चों को शिक्षा देना शुरू
किया ताकि आने वाली पीढ़ी भी इस महत्त्वपूर्ण सीख को समझ सके इस घटना के बाद गांव में कोई भी मरे हुए व्यक्ति की चीजें अपने पास रखने से पहले 10 बार सोचता अर्जुन के साथ-साथ पूरा गांव समझ गया था कि श्री कृष्ण की हर बात में गहरा रहस्य छिपा होता है जिसे समझना और अपनाना ही सच्ची भक्ति है और इस तरह श्री कृष्ण की उस शिक्षा ने नाना केवल अर्जुन का जीवन बदला बल्कि पूरे गांव को सही रास्ता दिखाया नया संकट गांव में आजन भी का आगमन अर्जुन के मार्गदर्शन में गांव में शांति और समृद्धि का दौर शुरू हो चुका था लोग खुशहाल थे और श्री कृष्ण की शिक्षा का अनुसरण कर रहे थे लेकिन जैसा
कि समय का नियम है जीवन में चुनौतियां कभी खत्म नहीं होती एक दिन गांव में एक अजनबी का आगमन हुआ वह एक लंबा रहरा और रहस्यमय व्यक्ति था उसकी आंखों में एक अजीब चमक थी और वह सीधे अर्जुन के घर आया अर्जुन ने उसका स्वागत किया और पूछा कौन हो तुम और इस गांव में क्यों आए हो अजनबी ने एक गहरी आवाज में उत्तर दिया मेरा नाम नकुल है मैं एक यात्री हूं और मैंने सुना है
कि इस गांव में श्री कृष्ण की एक अमूल्य सीख के कारण चमत्कार हुए हैं मुझे यह जानना है कि क्या तुम वाकई उस शिक्षा को समझते हो अर्जुन अर्जुन थोड़ा चौका लेकिन उसने शांत मन से कहा हां मैं श्री कृष्ण की उस शिक्षा का पालन करता हूं और गांव में भी इसका महत्व समझा चुका हूं पर तुम यह क्यों जानना चाहते हो नकुल ने एक रहस्यमय मुस्कान के साथ कहा अगर तुम्हें लगता है कि तुमने पूरी तरह से श्री कृष्ण की सीख को समझ लिया है तो मैं तुम्हें एक चुनौती देता हूं मेरे पास एक वस्त्र है जो मेरे पिता का था वह कुछ समय पहले दिवंगत हो गए यदि तुम लगता है कि यह वस्त्र मेरे पास नहीं होना चाहिए तो इसका निपटारा कर दो लेकिन ध्यान रहे अगर तुम गलत साबित हुए तो तुम्हें इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा
गांव के लोग जो आसपास इकट्ठा थे वे भी यह सुनकर अचंभित हो गए सबकी नजरें अर्जुन पर थी अर्जुन ने कुछ देर सोचा और फिर कहा नकुल अगर तुम्हारे पिता अब इस संसार में नहीं है तो यह वस्त्र तुम्हारे पास नहीं रहना चाहिए मैं इसे जल में विसर्जित कर दूं गा ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले नकल ने अपनी आंखों में एक अजीब चमक के साथ वस्त्र अर्जुन को सौंप दिया उसने कहा मैं देखता हूं कि तुम अपनी बात पर कितने दृढ़ हो अर्जुन ने गांव वालों को साथ लिया और नदी किनारे पहुंच गया सबके
सामने उसने मंत्रोच्चार के साथ वस्त्र को जल में विसर्जित कर दिया परंतु जैसे ही वस्त्र ने जल को छुआ नदी में हलचल मच गई पानी का रंग गहरा काला हो गया और एक भयंकर आंधी उठने लगी गांव वाले डर कर पीछे हट गए अर्जुन ने भी अपने मन में डर महसूस किया लेकिन वह शांत रहा नकुल ने हंसते हुए कहा तुमने तो बड़ी गलती कर दी अर्जुन यह वस्त्र साधारण नहीं था मेरे पिता की आत्मा इसमें बसती थी और अब तुमने उसे क्रोधित कर दिया है अब तुम्हारे गांव का क्या होगा अर्जुन ने साहस के साथ कहा नकुल मैं श्री कृष्ण की शिक्षा पर विश्वास करता हूं यह सही है कि मरे हुए लोगों की चीजें हमें नहीं रखनी चाहिए अगर यह वस्त्र वाकई उनके आत्मा का बंधन था तो मैंने इसे मुक्त कर दिया है और अगर मैंने कोई भूल की है
तो मैं उसे सुधारने के लिए तैयार हूं इतना कहकर अर्जुन ने मन ही मन श्री कृष्ण का ध्यान किया और उनसे मार्गदर्शन की प्रार्थना की उसी क्षण आसमान में घने बादल छा गए और बिजली चमकने लगी अचानक नदी का जल फिर से साफ होने लगा गांव के लोगों ने देखा कि नदी के जल में एक दिव्य आकृति प्रकट हुई यह आकृति किसी और की नहीं बल्कि स्वयं श्री कृष्ण की थी श्री कृष्ण ने कहा अर्जुन तुमने सही किया नकल का पिता उसकी आत्मा को अपने वस्त्र में बांधकर उसे छोड़ना नहीं चाहता था तुम्हारे इस कृत्य ने उसकी आत्मा को मुक्ति दिलाई है और नकुल तुम्हारी परीक्षा का समय अब समाप्त हुआ
अपने पिता की आत्मा को मुक्त करने के लिए तुम्हारा धन्यवाद अब इस गांव को कोई कष्ट नहीं होगा नकुल जो अब तक घमंड में था अचानक घुटनों के बल गिर पड़ा और उसने रोते हुए कहा प्रभु मुझे क्षमा करें मैंने अपने पिता के मोह में पढ़कर इस गांव पर संकट लाया मुझे अपनी गलती का एहसास हो गया है श्री कृष्ण ने उसे ममता भरी दृष्टि से देखा और कहा तुम्हारा पश्चाताप तुम्हें क्षमा दिलाता है अब आगे बढ़ो और अपने जीवन को सद मार्ग पर चलाओ मोह से मुक्ति ही सच्चा ज्ञान है अर्जुन ने श्री कृष्ण को नमन किया और कहा प्रभु आपकी शिक्षा ने हमें फिर से सही मार्ग दिखाया आपका आशीर्वाद हमेशा हमारे गांव पर बना रहे श्री कृष्ण की आकृति धीरे-धीरे गायब हो गई और आकाश में एक अद्भुत रोशनी फैल गई गांव के लोग भाव विभोर हो गए और उन्होंने अर्जुन की समझदारी की प्रशंसा की अब नकुल भी गांव में रहकर अर्जुन के साथ मिलकर लोगों को श्री कृष्ण की शिक्षाएं सिखाने लगा उसने अपने पिता की आत्मा को मुक्त करने के बाद जीवन में
एक नया उद्देश्य पाया गांव में सुख शांति फिर से लौट आए और अर्जुन ने महसूस किया कि सच्ची भक्ति वह है जो हमें मोह और अहंकार से मुक्ति दिलाए अर्जुन की यात्रा अब भी जारी थी लेकिन हर कदम पर उसे विश्वास था कि श्री कृष्ण की शिक्षा और उनका मार्गदर्शन हमेशा उसके साथ रहेगा गांव ने एक बार फिर सीख लिया कि जीवन में भक्ति का सही अर्थ क्या होता है और मरे हुए लोगों की चीजों का त्याग करना ना केवल सम्मान का प्रतीक है बल्कि हमारी मा की मुक्ति का मार्ग भी अंतिम परीक्षा मोह की कठिन परीक्षा नकुल के जाने के बाद अर्जुन और गांव के लोग एक बार फिर से अपने सामान्य जीवन में लौट आए लेकिन इस बार अर्जुन के मन में एक बात लगातार घूम रही थी उसने महसूस किया कि मोह और अज्ञानता ही
मनुष्य के दुखों का सबसे बड़ा कारण है उसे इस बात का एहसास हुआ कि अभी उसकी परीक्षा समाप्त नहीं हुई है एक दिन एक वृद्ध महिला गांव में आई उसके हाथ में एक पुराना फटा हुआ कपड़ा था वह बहुत ही परेशान और उदास दिख रही थी वह अर्जुन के पास आए और रोते हुए बोली बेटा मेरा इकलौता बेटा पिछले महीने इस दुनिया से चला गया उसके बिना मैं बिल्कुल अकेली हो गई हूं मेरे पास उसकी केवल यही चादर बची है जो मुझे उसके पास होने का एहसास दिलाती है मैं इसे त्याग नहीं सकती क्या तुम मुझे कोई उपाय बता सकते हो जिससे मुझे शांति मिल सके अर्जुन ने ने उसकी बातें सुनी और उसकी आंखों में उसकी पीवा देखी उसने उस चादर की ओर देखा जो बहुत पुरानी और जर्ज थी लेकिन उसमें मां की अपने बेटे के प्रति
असीम ममता और मोह समाया हुआ था अर्जुन ने कहा मां मरे हुए लोगों की चीजें हमें छोड़नी होती हैं ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले लेकिन मैं तुम्हारे दर्द को समझता हूं आओ मैं तुम्हें एक उपाय बताता हूं वह वृद्ध महिला हैरान होकर बोली क्या मैं अपने बेटे की चादर को अपने पास नहीं रख सकती यह मेरे लिए उसकी आखिरी निशानी है इसे त्यागने का विचार मुझे अंदर से तोड़ देता है अर्जुन ने उसके कांपते हाथों को अपने हाथों में लिया और गहरी सांस लेते हुए कहा मां इस चादर को त्यागने का अर्थ
तुम्हारे बेटे के प्रति प्रेम को त्यागना नहीं है बल्कि यह उसे मुक्त करने का एक तरीका है यदि तुम चाहो तो हम इस चादर को पूरे गांव के सामने एक दीप की तरह जलाकर उस दीप के प्रकाश में अपने बेटे की याद को हमेशा जीवित रख सकते हैं इस तरह उसकी आत्मा को भी शांति मिलेगी और तुम्हें भी वृद्ध महिला ने कुछ देर सोचा उसकी आंखों में आंसू थे लेकिन अर्जुन की बातों में एक सच्चाई भी थी उसने धीरे-धीरे सिर हिलाया और कहा ठीक है बेटा मैं तुम्हारी बात मानती हूं मैं चाहती हूं कि मेरे बेटे की आत्मा को शांति मिले अर्जुन ने गांव के लोगों को इकट्ठा किया और नदी किनारे एक छोटी सी रस्म का आयोजन किया उसने चादर को एक दीप के साथ जलाया और कहा यह प्रकाश हमें याद दिलाता है कि हमारे प्रियजन सदा हमारे दिल में जीवित रहते हैं उनकी चीजें हमें छोड़नी होती हैं ताकि वे आगे की यात्रा पर जा सके और हमें भी आगे बढ़ने का साहस मिल सके जैसे ही चादर जलकर राख हुई वृद्ध महिला की आंखों में एक अजीब सा सुकून
दिखाई दिया वह बोली मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरा बेटा अब शांति से है मैं अब उसके बिना जी सकती हूं यह जानते हुए कि उसकी को मुक्ति मिल गई है लेकिन तभी आसमान में एक तेज बिजली कड़की और चारों ओर अंधेरा छा गया गांव वालों में हड़कंप मच गया अर्जुन ने भी घबराहट महसूस की पर उसने अपने मन को शांत रखा तभी एक अज्ञात आवाज बंजी अर्जुन तुमने मोह का त्याग कर सही राह चुनी है परंतु यह अंतिम परीक्षा नहीं है तुम्हारे लिए अभी एक और परीक्षा बाकी है अर्जुन ने घुटनों के बल बैठकर कहा प्रभु जो भी परीक्षा मेरे सामने है मैं उसे सहर्ष स्वीकार करता हूं मुझे मार्ग दिखाए
अचानक सामने एक चमकीली रोशनी में एक दिव्य आकृति प्रकट हुई वह स्वयं श्री कृष्ण थे उनका तेज इतना अद्भुत था कि सभी गांव वाले अवाक रह गए श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा अर्जुन यह अंतिम परीक्षा है मोह केवल चीजों का नहीं विचारों और भावनाओं का भी होता है अब तुम्हें अपने भीतर के मोह को भी त्यागना होगा अर्जुन ने विनम्रता से पूछा प्रभु मैं क्या कर सकता हूं मुझे मार्ग दिखाए श्री कृष्ण ने उसे मुस्कुराते हुए देखा और कहा तुम्हारे भीतर अपने ज्ञान का गर्व और अपने निर्णयों पर विश्वास का मोह है उसे त्याग दो और यह मान लो कि हर समय और हर परिस्थिति में तुम्हें कुछ नया सीखने की आवश्यकता है यह समझ लो कि तुम केवल साधन हो ज्ञान और शक्ति का स्रोत मैं हूं अर्जुन ने यह सुनकर अपनी
गलती समझी उसने सिर झुकाकर कहा प्रभु मुझे अहंकार और गर्व का एहसास नहीं था मैं समझ गया हूं कि मैं आपका निमित मात्र हूं मुझे क्षमा करें और सही मार्ग पर चलने का आशीर्वाद दें श्री कृष्ण ने उसे आशीर्वाद देते हुए कहा तुम्हारी विनम्रता ने तुम्हें सच्चे अर्थों में मेरी शिक्षा का अधिकारी बना दिया है अब जाओ और इस गांव को सदा के लिए शांति और समृद्धि का रास्ता दिखाओ
श्री कृष्ण की आकृति धीरे-धीरे अदृश्य हो गई लेकिन उनकी उपस्थ का अनुभव हर व्यक्ति ने अपने दिल में किया अर्जुन ने महसूस किया कि उसकी आत्मा में एक नया प्रकाश भर गया है उसने अपने भीतर के मोह को त्याग दिया और गांव के लोगों को भी आत्मनिरीक्षण और सच्चे ज्ञान की ओर प्रेरित किया उस दिन से गांव में ना केवल बाहरी सुख शांति बनी रही बल्कि हर व्यक्ति के मन में भी एक आंतरिक शांति आ गई अर्जुन का जीवन अब और भी सरल और विनम्र हो गया था और उसकी एक ही प्रार्थना थी हे श्री कृष्ण आपकी शिक्षा हमें सदा सही मार्ग दिखाती रहे गांव वालों ने भी यह सीख ली कि ना केवल बाहरी चीजों का त्याग बल्कि
अपने भीतर के मोह और अहंकार का त्याग भी जरूरी है और इस तरह अर्जुन ने ना केवल अपने गांव को सही दिशा दिखाई बल्कि अपने जीवन की अंतिम परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली प्रेम और भक्ति की विजय अंतिम विदाई अर्जुन के मन में अब एक अद्भुत शांति और विनम्रता थी गांव के लोग भी अब उसके प्रति सम्मान और प्रेम से भर गए थे अर्जुन ने गांव के हर व्यक्ति को श्री कृष्ण की शिक्षा का गुण अर्थ समझाया और बताया कि केवल बाहरी चीजों का नहीं बल्कि भीतर के अहंकार और मोह का त्याग ही सच्चा जीवन है अब गांव में हर व्यक्ति के दिल में ना केवल श्री कृष्ण के प्रति आस्था थी बल्कि स्वयं की आत्मा के प्रति भी एक नया दृष्टिकोण था कुछ महीनों के बाद एक दिन अर्जुन को सपने में फिर से श्री कृष्ण की दिव्य आकृति दिखाई दी
इस बार श्री कृष्ण ने मुस्कुराते हुए कहा अर्जुन अब तो तुम्हारा काम इस गांव में पूरा हो चुका है लेकिन तुम्हारे लिए आगे की यात्रा बाकी है अब तुम्हें उस ज्ञान को और भी लोगों तक पहुंचाना होगा अर्जुन ने जागते ही अपनी आंखें खोली और उसने निर्णय लिया कि अब वह अपना घर और गांव छोड़कर यात्रा पर निकलेगा वह चाहता था कि वह श्री कृष्ण की शिक्षा का प्रसार दूर-दूर के गांवों में भी करें ताकि लोग मोह अहंकार और मरे हुए लोगों की चीजों का त्याग कर जीवन में सच्चा सुख प्राप्त कर सके अर्जुन के जाने की खबर सुनकर गांव के लोग उदास हो गए एक वृद्ध महिला ने कहा अर्जुन तुम हमारे लिए एक मार्गदर्शक हो
अगर तुम चले जाओगे तो हम बिना तुम्हारे कैसे रह पाएंगे अर्जुन ने उसे समझाते हुए कहा मां यह यात्रा मेरे जीवन का एक हिस्सा है मैं यह समझा चुका हूं कि असली शक्ति और ज्ञान मेरे भीतर नहीं बल्कि श्री कृष्ण की शिक्षा में है तुम्हें बस उस शिक्षा पर भरोसा करना है और वह हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा गांव के सरपंच जो पहले अर्जुन की बातों को नजरअंदाज कर दिया करते थे ने भी हाथ जोड़कर कहा अर्जुन तुमने हमें अज्ञानता से निकालकर सही मार्ग दिखाया हम तुम्हें कभी नहीं भूल पाएंगे अर्जुन ने विनम्रता से सबका आशीर्वाद लिया और कहा श्री कृष्ण की यह शिक्षा कि मरे हुए लोगों की चीजें हमारे लिए नहीं है हमें यह सिखाती है कि हमें बीते हुए कल के बंधनों में नहीं फंसना चाहिए आगे बढ़ना सीखना और ज्ञान का
प्रसार कर ही जीवन का असली उद्देश्य है मेरा यह वादा है कि मैं जहां भी जाऊंगा श्री कृष्ण की शिक्षा का प्रचार करता रहूंगा अर्जुन ने गांव के बच्चों को भी गले लगाया और उन्हें सिखाया कि सच्ची भक्ति में विनम्रता और त्याग ही सबसे बड़ी शक्ति है वह कहता जीवन की हर कठिनाई में श्री कृष्ण का स्मरण करना और यह याद रखना कि हर वस्तु का त्याग उसके समय पर करना ही हमारे और दूसरों की
भलाई में है उस दिन गांव के लोग अर्जुन को विदा देने के लिए नदी के किनारे इकट्ठा हुए अर्जुन ने नदी के जल को हाथ में लेकर प्रण किया हे श्री कृष्ण आप जहां भी हैं मुझे आपके मार्ग पर चलने का आशीर्वाद दें मुझे आपके प्रेम और शिक्षा के प्रति सच्ची निष्ठा बनी रहे जैसे ही अर्जुन ने यह कहा आसमान में एक दिव्य प्रकाश फैल गया गांव वाले चकित रह गए जब उन्होंने देखा कि आकाश में श्री कृष्ण की छवि एक बार फिर प्रकट हुई श्री कृष्ण ने अपनी ममता भरी मुस्कान के साथ कहा अर्जुन तुम्हारा मार्ग सदा सही रहेगा तुमने मोह और अहंकार को त्याग कर सच्ची भक्ति का मार्ग अपनाया है जाओ और प्रेम और भक्ति का यह संदेश सबको दो मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा यह कहते ही श्री कृष्ण की छवि धीरे-धीरे आकाश में
विलीन हो गई अर्जुन ने आंसुओं के साथ उन्हें अंतिम प्रणाम किया और अपनी यात्रा पर निकल पड़ा गांव के लोग उसे जाते हुए देख रहे थे लेकिन उनके दिल में एक संतोष था कि उन्होंने अर्जुन से जो शिक्षा पाई है वह उनकी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक धरोहर बनी रहेगी गांव में अब अर्जुन की जगह उसकी शिक्षाएं जीवित थी लोग मरे हुए लोगों की चीजों का त्याग करने में समझदारी दिखाते अपने भीतर के अहंकार को पहचानने की कोशिश करते और हर परिस्थिति में श्री कृष्ण की सीख को याद रखते अर्जुन के जाने के बाद भी गांव में उसकी कहानियां और शिक्षाएं सदा जीवित रही और श्री कृष्ण की कृपा से गांव में सदा के लिए श शांति और समृद्धि का वास हो गया और इस तरह अर्जुन की यात्रा ने यह साबित कर
दिया कि सच्चा ज्ञान और भक्ति हमें ना केवल आत्मा की शांति प्रदान करते हैं बल्कि पूरे समाज को सही दिशा भी दिखाते हैं श्री कृष्ण की शिक्षा का प्रसार करके अर्जुन ने अपने जीवन को सच्चे अर्थों में सार्थक बना दिया धन्यवाद सभी भक्तजनों को मैं आशा करता हूं आप सभी ने यह कथा ध्यानपूर्वक सुनी होगी ऐसे ही हिंदू धर्म की जानकारी प्राप्त करने के लिए हम चैनल को सब्सक्राइब अवश्य करें अगर आपको हमारे इस चैनल से माध्यम से कोई भी हमें वीडियो का सजेशन देना है तो आप हमें जरूर कमेंट सेक्शन में कमेंट करें हम आपके प्रदेश अनुसार आवश्यक वीडियो बनाएंगे अ [संगीत] [संगीत] [हंसी] [संगीत] [संगीत] [संगीत] ब [संगीत]
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